प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 24 July 2026

यह ठहराव नीति की जीत नहीं, मौसम का उधार है।

काग़ज़ पर आज दिल्ली का औसत AQI 78 दिखता है, मगर मौसम का हिस्सा अलग करते ही यह 100 पर आ ठहरता है, यानी असल हवा इससे भी ख़राब है।

+40.7%
पिछले साल से बदतर
PM2.5, मौसम का असर हटाकर
219
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
NSIT Dwarka, ख़राब
विश्लेषण की अवधि: 23 जुलाई सुबह 10 बजे से 24 जुलाई सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 17 जुलाई से 31 जुलाई 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 0.6 MB
हिंदी में। अवधि 117 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

मौसम का हिस्सा गणित से हटा देने पर भी दिल्ली के पूरे 30 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर हैं, औसतन 23 AQI अंक ऊपर। यह चढ़ाव पूरे शहर में फैला है, कहीं कोई राहत नहीं।
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’ यानी de-weathering का मतलब यह है, कि आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा हम गणित के ज़रिए अलग कर देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धो या बहा ले जाती है, जबकि थमी-सी हवा उसे वहीं रोके रखती है, इसीलिए किसी एक दिन की हवा महज़ मौसम के कारण अच्छी या बुरी दिख सकती है। मौसम का यह हिस्सा निकालने के बाद जो बाक़ी रहता है, वही शहर का अपना, सच्चा प्रदूषण है, और वही 56 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
आज की सबसे बड़ी बात यही है, कि मौसम का असर पूरी तरह निकाल देने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten लगातार 56 दिन से पिछले साल के ठीक इन्हीं दिनों के मुक़ाबले ऊपर टिका हुआ है। पूरे 56 दिन, मई से आज तक, एक भी दिन यह पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। मौसम का हिस्सा हटा देने के बावजूद यह बिगड़ाव क़ायम रहता है। यह लगातार चलता, टिकाऊ बिगड़ाव है, और यही आज की असली कहानी है।
Against the WHO standard
दिल्ली के 43 में से 40 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा के पार हैं, और 43 में से 39 स्टेशन PM ten की WHO सीमा के ऊपर हैं।
Worst station
सबसे बुरी हालत NSIT Dwarka की है, जहाँ AQI 219 और श्रेणी ‘ख़राब’ है, और इसे चढ़ा रहा है PM two point five। मौसम का हिस्सा हटा देने पर भी यहाँ की हवा पिछले साल से 23 अंक और ख़राब है।
11 स्टेशनों पर AQI पिछले साल से बढ़ा है, और NSIT Dwarka में तो पूरे 137 अंक ऊपर। प्रदूषण का बोझ हर जगह बराबर नहीं है।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index के हिसाब से, दिल्ली का यह प्रदूषण हर बाशिंदे की औसत ज़िंदगी को कई साल तक घटा देता है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। पहली, PM ten के स्रोतों यानी निर्माण-धूल और सड़क-धूल, और PM two point five के स्रोतों यानी उद्योग, वाहन और बायोमास-दहन, दोनों पर बिना देर किए सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur का इलाक़ा, जहाँ PM ten 145.1 micrograms यानी WHO सीमा से 3.2 गुना ऊपर है, और मौसम-मुक्त हवा पिछले साल से 2 अंक और बिगड़ी है, वहाँ स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी हो। तीसरी, हर स्टेशन का real-time AQI नागरिकों को खुले तौर पर उपलब्ध कराया जाए।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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