आज की पूरी रिपोर्ट
लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।
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मौसम का असर हटाने के बाद
हर बिंदु उस दिन का PM10 स्तर है, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं।
आज की रिपोर्ट क्या कहती है
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, यानी de-weathering, का मतलब यह है — हम आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा गणित के ज़रिए निकाल बाहर करते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धो देती या बहा ले जाती है, और थमा हुआ मौसम उसे रोके रखता है — इसीलिए किसी एक दिन की हवा अच्छी या बुरी महज़ मौसम के चलते दिख सकती है। मौसम का यह हिस्सा हटा देने पर जो शेष रहता है, वही शहर का अपना, सचमुच का प्रदूषण है — और वही 51 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
Weather is not the excuse
पिछले साल के मुक़ाबले इस बार बारिश 4.4 मिमी से सिमटकर 0 मिमी रह गई — बारिश न हो तो प्रदूषण धुलता ही नहीं — इसलिए वह ज़्यादा देर ठहरा और हवा बदतर दिखी। लेकिन मौसम का असर हटा दें, तो AQI पिछले साल से 23 अंक ऊपर बैठता है — असली प्रदूषण चढ़ा है; और आँखों को जो बिगड़ाव दिखा, उसमें मौसम का बड़ा हाथ है।
Pollutant detail
मौसम का असर निकाल देने पर PM ten पिछले साल से 30 percent ऊपर बैठता है — यह चढ़ाव नीति की नाकामी है, मौसम की नहीं। भरोसे का दायरा 24.1 से 36.5 percent — इसमें मॉडल की अपनी अनिश्चितता भी शामिल है।
Pollutant detail
मौसम का असर निकाल देने पर PM two point five पिछले साल से 38 percent ऊपर ठहरता है — यह इज़ाफ़ा नीति की चूक है, मौसम की नहीं। भरोसे का दायरा 32 से 43.6 percent — इसमें मॉडल की अपनी अनिश्चितता भी जोड़ी गई है।
Against the WHO standard
आज PM two point five में दिल्ली के सभी 45 स्टेशन WHO सीमा के ऊपर हैं — और PM ten में तो सभी 45 स्टेशन WHO ही नहीं, भारत के NAAQS मानक को भी पार कर रहे हैं।
Worst station
सबसे बुरी हालत Anand Vihar की है — AQI 335, यानी ‘बहुत ख़राब’ श्रेणी, और इसे ऊपर धकेल रहा है PM ten।
What it does to health
इतनी ख़राब हवा में साँस और दिल के मरीज़ों, छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को तकलीफ़ उठानी पड़ सकती है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें — पहली, PM ten के स्रोतों — निर्माण-धूल और सड़क-धूल — और PM two point five के स्रोतों — उद्योग, वाहन और बायोमास-दहन — दोनों पर बिना देर सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur के इलाक़े में स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई हो और स्वास्थ्य-चेतावनी जारी की जाए। तीसरी, AQI के लक्ष्य WHO मानकों की ओर कड़े किए जाएँ।
एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं
गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।
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