प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

आज · 16 September 2026

12 लाख ज़िंदगियां एक स्टेशन के ज़हर में सांस ले रही हैं

आज दिल्ली का औसत AQI 100 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

184
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Pusa

आज के कार्ड

स्वास्थ्य चेतावनी — AQLIAQI में सबसे ऊँचा — Pusa AQI 184; 4 किमी में 12 लाख 35 हज़ार लोगअसमानता — 13 स्टेशन साल-दर-साल बिगड़े (Pusa +82)WHO सीमा पार — PM2.5 41/43, PM10 43/43 (NAAQS 15)28% of Delhi's reporting monitors (11.8 of 43.1) read above AQI 200 on

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 15 सितंबर सुबह 10 बजे से 16 सितंबर सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 9 सितंबर से 23 सितंबर 2025
एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं: गैस आँकड़ों, ख़ासकर NO2, में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं, इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।
लंबा रिकॉर्ड

दिल्ली की हवा की तबाही

1980 से जुलाई 2026 तक, सैंतालीस वर्षों का प्रमाण

इस पूरे रिकॉर्ड में एक बर्ष भी ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली ने भारत के अपने वार्षिक मानक को पूरा किया हो। सरकार के अपने मॉनिटरों पर 2024 में यह शहर 104 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर सांस ले रहा था, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमा से लगभग 21 गुना है, और 2026 में समाप्त हुए जाड़े का औसत 200 था।

उत्तर भारत में पीएम2.5 का वार्षिक औसत, प्रत्येक खंड एक ही अवधि का स्तर दिखाता है।

उत्तर भारत में पीएम2.5 का वार्षिक औसत, प्रत्येक खंड एक ही अवधि का स्तर दिखाता है।

आज

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

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संग्रह

लगातार सिलसिला

हर उस दिन की एक रिपोर्ट, जिस दिन निगरानी नेटवर्क ने ईमानदारी से प्रकाशन लायक़ पर्याप्त स्टेशन दर्ज किए।

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फ़िल्में

किरण

हर दिन एक छोटी फ़िल्म, हिंदी में, उसी विश्लेषण से बनी जिससे उस दिन की लिखित रिपोर्ट बनी है।

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गहन संस्करण

साप्ताहिक आकलन

हर हफ़्ते एक लंबा हिसाब: सातों दिन एक साथ, क्या बदला, और वह बदलाव किस वजह से आया।

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पड़ताल

सबूत

रोज़ के रिकॉर्ड से आगे जाकर की गई स्वतंत्र पड़ताल।

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तरीक़ा

मौसम का असर हटाना

हम शहर के अपने प्रदूषण को मौसम से अलग कैसे करते हैं, और यही एकमात्र ईमानदार तुलना क्यों है।

तरीक़ा जानें

प्रकाशक

सड़क की ऊँचाई से

प्रकाशक अजय माकन, संसद सदस्य। आधार सीपीसीबी के सरकारी आँकड़े। विश्लेषण, और उसमें कोई भी ग़लती, हमारी है।

परिचय और संपर्क

आभार

विशेष आभार: Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA)। इस विश्लेषण का आधार वही घंटेवार संकलन है जो CREA तैयार करता है, और हवा को लेकर जन जागरूकता बढ़ाने में उसका अपना योगदान बड़ा है। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है, और इसके विश्लेषण या निष्कर्षों की ज़िम्मेदारी उस पर नहीं है।