प्रकाशक Ajay Maken, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 01 August 2026

मौसम हटाने पर भी दिल्ली की हवा लगातार 63 दिन से पिछले साल से बदतर है। एक दिन भी राहत नहीं। यह टिकाऊ प्रदूषण है, मौसम नहीं।

दिखने में आज दिल्ली का औसत AQI 81 है, मगर मौसम का असर निकाल देने पर यह 86 पर पहुँच जाता है, यानी हक़ीक़त में उससे भी ख़राब।

63
लगातार दिन बदतर
पिछले साल की इसी अवधि से
139 / 212
इस साल बदतर दिन
2026 में मापे गए कुल दिनों में से
+15.0
औसत अधिकता, µg/m³
PM10 पिछले साल से ऊपर, मौसम का असर हटाकर
विश्लेषण की अवधि: 31 जुलाई सुबह 10 बजे से 1 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 25 जुलाई से 8 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 1.2 MB
हिंदी में। अवधि 118 सेकंड।

सबूत

रोज़ का residual: इस साल का स्तर घटा पिछले साल का

■ लाल रेखा: मौसम का असर हटाने के बाद का residual। शून्य रेखा से ऊपर यानी प्रदूषण पिछले साल से ज़्यादा था; शून्य रेखा से नीचे यानी कम था।
+0+10+20+30 पिछले साल के बराबर +7.6 30 May30 Jun01 Aug µg/m³
हर बिंदु एक residual है: उस दिन का PM10 स्तर, घटा पिछले साल की इसी अवधि का स्तर, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। शून्य रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच पिछले साल से बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं; रेखा से नीचे का मतलब है सचमुच साफ़।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

weather_mask
मौसम का असर हटाते ही दिल्ली का AQI पिछले साल से 7 अंक ऊपर बैठता है, यानी ज़मीनी हवा और बिगड़ी है। इसे सबसे ज़्यादा ozone, carbon monoxide और PM two point five चढ़ा रहे हैं। सात में से 6 प्रदूषकों की हालत या तो जस की तस है या और ख़राब। यह चढ़ाव नीति की नाकामी है, मौसम की मेहरबानी नहीं।
Weather is not the excuse
पिछले साल के मुक़ाबले इस बार मिक्सिंग ऊँचाई 494.8 से चढ़कर 678.8 मीटर हो गई, और ऊँची मिक्सिंग परत प्रदूषण को बिखेर देती है, इसलिए प्रदूषण ज़्यादा फैला और हवा देखने में साफ़ लगी। मगर मौसम का असर हटाते ही AQI पिछले साल से 7 अंक ऊपर है, यानी असली प्रदूषण चढ़ा है; यह दिखावटी सफ़ाई नीति की नहीं, मौसम की देन है।
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, यानी de-weathering, का मतलब है कि हम आँकड़ों से हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा गणित के ज़रिए अलग कर देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धोकर या उड़ाकर ले जाती है, और थमा हुआ मौसम उसे वहीं जमाए रखता है, इसीलिए किसी एक दिन की हवा भली या बुरी महज़ मौसम के कारण दिख सकती है। मौसम का यह हिस्सा हट जाने के बाद जो शेष रहता है, वही शहर का अपना, सच्चा प्रदूषण है, और वही 63 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
dw_station_breadth
मौसम का हिस्सा हटा देने पर भी दिल्ली के सभी 30 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर निकलते हैं, औसतन 7 AQI अंक ऊपर। यह चढ़ाव पूरे शहर में फैला है, एक भी स्टेशन इससे नहीं बचा।
Against the WHO standard
दिल्ली के 43 में से 40 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा को लाँघ चुके हैं, और 44 में से 41 स्टेशन PM ten की WHO सीमा से ऊपर हैं।
Worst station
सबसे बुरी हालत Wazirpur की है, जहाँ मौसम का असर हटाते ही AQI 134 पर पहुँचता है और PM ten 150.4 micrograms, यानी WHO सीमा से 3.3 गुना ऊपर।
worst_station_ugm3
µg/m³ के पैमाने पर सबसे ख़राब हाल Bawana का है, जहाँ PM two point five 44 micrograms यानी WHO से 3 गुना ऊपर; और Wazirpur में PM ten 190 micrograms, WHO से 4 गुना ऊपर।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index की गणना कहती है कि दिल्ली का यह प्रदूषण औसत आयु से कई साल छीन लेता है।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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