प्रकाशक Ajay Maken, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 02 August 2026

मौसम हटाने पर भी दिल्ली की हवा लगातार 64 दिन से पिछले साल से बदतर है। एक दिन भी राहत नहीं। यह टिकाऊ प्रदूषण है, मौसम नहीं।

कागज़ पर आज दिल्ली का औसत AQI 87 दिखता है, मगर मौसम का असर हटाते ही यह 89 पर पहुँच जाता है, यानी हक़ीक़त में उससे भी बदतर।

64
लगातार दिन बदतर
पिछले साल की इसी अवधि से
140 / 213
इस साल बदतर दिन
2026 में मापे गए कुल दिनों में से
+14.9
औसत अधिकता, µg/m³
PM10 पिछले साल से ऊपर, मौसम का असर हटाकर
विश्लेषण की अवधि: 1 अगस्त सुबह 10 बजे से 2 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 26 जुलाई से 9 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 1.2 MB
हिंदी में। अवधि 119 सेकंड।

सबूत

रोज़ का residual: इस साल का स्तर घटा पिछले साल का

■ लाल रेखा: मौसम का असर हटाने के बाद का residual। शून्य रेखा से ऊपर यानी प्रदूषण पिछले साल से ज़्यादा था; शून्य रेखा से नीचे यानी कम था।
+0+10+20+30 पिछले साल के बराबर +10.4 30 May01 Jul02 Aug µg/m³
हर बिंदु एक residual है: उस दिन का PM10 स्तर, घटा पिछले साल की इसी अवधि का स्तर, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। शून्य रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच पिछले साल से बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं; रेखा से नीचे का मतलब है सचमुच साफ़।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, जिसे de-weathering कहते हैं, का मतलब है कि हम आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान की भूमिका को हिसाब लगाकर निकाल देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को बहा या धो ले जाती है, जबकि ठहरा हुआ मौसम उसे वहीं क़ैद रखता है, इसीलिए किसी एक दिन की हवा का अच्छा या बुरा दिखना अकेले मौसम की देन हो सकता है। जब मौसम का यह हिस्सा हट जाता है, तब जो बाक़ी रहता है वही शहर का अपना, असली प्रदूषण है, और वही 64 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
weather_mask
मौसम का असर हटाते ही दिल्ली का AQI पिछले साल से 9 अंक ऊपर बैठता है, यानी ज़मीनी हवा और बिगड़ी है। इसे सबसे ज़्यादा PM two point five, PM ten और sulphur dioxide चढ़ा रहे हैं। सात में से 5 प्रदूषकों की हालत या तो जस की तस है या और ख़राब। यह चढ़ाव नीति की नाकामी है, मौसम की मेहरबानी नहीं।
Weather is not the excuse
पिछले साल के मुक़ाबले इस बार मिक्सिंग ऊँचाई 478.2 से चढ़कर 565 मीटर हो गई, और ऊँची मिक्सिंग परत प्रदूषण को बिखेर देती है, इसलिए प्रदूषण ज़्यादा फैला और हवा देखने में साफ़ लगी। मगर मौसम का असर हटाते ही AQI पिछले साल से 9 अंक ऊपर है, यानी असली प्रदूषण चढ़ा है; यह दिखती राहत नीति की नहीं, मौसम की देन है।
dw_station_breadth
मौसम का हिस्सा निकाल देने पर भी दिल्ली के सभी 29 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर निकलते हैं, औसतन 9 AQI अंक ऊपर। यह चढ़ाव पूरे शहर में फैला है, एक भी स्टेशन इससे नहीं बचा।
Against the WHO standard
दिल्ली के 39 में से 38 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा को लाँघ चुके हैं; और 42 में से पूरे 42 स्टेशन PM ten की WHO सीमा से ऊपर हैं। मौसम का असर हटाने के बाद भी दिल्ली का अपना PM two point five WHO की सुरक्षित सीमा से 2.4 गुना ऊपर बना हुआ है।
aqi_rose_dod
कल की तुलना में आज दिल्ली का AQI 6 अंक और ऊपर चढ़ गया। 33 में से ज़्यादातर स्टेशन कल के मुक़ाबले और बिगड़े हैं।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index की गणना बताती है कि दिल्ली का यह प्रदूषण औसत आयु में से कई साल छीन लेता है।
Worst station
सबसे बुरी हालत Wazirpur की है, जहाँ मौसम का असर हटाते ही AQI 135 पर पहुँचता है और PM ten 150.9 micrograms, यानी WHO सीमा से 3.4 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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