carbon monoxide भी पिछले साल इन्हीं दिनों से 32 percent ऊपर चल रहा है। पर यह सिर्फ़ संदर्भ है, आज का आकलन भरोसेमंद PM two point five और PM ten पर ही टिका है।
पिछले साल से 6 अंक ऊपर है दिल्ली का AQI, मौसम का असर हटाने पर भी; ज़मीनी हवा बिगड़ी है। इसे चढ़ा रहे हैं PM ten, PM two point five, carbon monoxide। सात में से 5 प्रदूषकों में हालत जस की तस या बदतर है। यह बढ़त नीति की नाकामी है, मौसम की कृपा नहीं।
मई से लेकर आज तक, जितने दिनों के आँकड़े मौजूद हैं, उनमें एक भी दिन ऐसा नहीं जब दिल्ली का अपना PM ten पिछले साल के स्तर से नीचे आया हो। लगातार 73 दिन, और यह मौसम का असर पूरी तरह हटा देने के बाद का हिसाब है। 1 दिन का आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। औसतन 14 माइक्रोग्राम का यह अंतर हर दिन बना रहा, और इस साल अब तक 222 में से 149 दिन पिछले साल के ऊपर बीते हैं। पिछले हफ़्ते इसकी रफ़्तार ज़रूर धीमी पड़ी है, पर बिगड़ाव वहीं का वहीं है। यही आज की असली कहानी है।
What de-weathering means
de-weathering, यानी ‘मौसम का असर हटाना’, है क्या? आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा गणित से अलग कर दिया जाता है। तेज़ हवा और बारिश प्रदूषण को बहा ले जाती है, शांत मौसम उसे रोक लेता है, इसलिए किसी एक दिन की हवा सिर्फ़ मौसम की वजह से अच्छी या बुरी दिख सकती है। इसके बाद जो बचता है, वही शहर का अपना, सचमुच का प्रदूषण है, और वही 73 दिन से लगातार ऊपर है।
जिन 28 स्टेशनों का पिछले साल का आँकड़ा मौजूद है, वे सब आज उससे बदतर हैं, मौसम का असर हटाने पर भी; बीच का स्टेशन 6 AQI अंक ऊपर। कोई इलाक़ा छूटा नहीं।
Worst station
Wazirpur सबसे ख़राब हालत में है: मौसम का असर हटाने पर वहाँ AQI 130 और PM ten 143.6 micrograms, यानी WHO सीमा से 3.2 गुना ऊपर।
What it does to health
University of Chicago का Air Quality Life Index कहता है, दिल्ली का प्रदूषण औसत आयु से सालों छीनता है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। एक, PM ten के स्रोतों (निर्माण-धूल, सड़क-धूल) और PM two point five के स्रोतों (उद्योग, वाहन, बायोमास-दहन), दोनों पर तुरंत सख़्ती। दो, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur में स्थानीय स्रोतों पर तुरंत कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी। तीन, AQI के लक्ष्य WHO मानकों की ओर कड़े हों।