14 लाख लोग जिस स्टेशन के चार किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, वही Anand Vihar आज सबसे ऊपर रहा, AQI 347। यह औसत नहीं, इन लोगों की साँस पर पड़ा बोझ है।
39 में से अधिकतर स्टेशनों की हवा कल से बिगड़ी, और शहर का AQI एक दिन में 26 अंक ऊपर गया।
औसत भर से बात नहीं बनती। इस साल के औसत दिन पर दिल्ली के अपने 13 मॉनिटर, क़रीब एक तिहाई शहर, AQI दो सौ के पार पढ़ते रहे; पिछले साल यह 31 प्रतिशत था। साँस शहर के औसत से नहीं, अपने मोहल्ले की हवा से चलती है।
सिर्फ़ औसत नहीं, इस साल की पूरी तस्वीर देखिए। जो चौथाई हिस्सा साल में सबसे साफ़ था, वह 101 से 119 पर जा चुका है, यानी सबसे साफ़ दिन भी अब मैले हैं। पिछले साल की इन्हीं तारीख़ों से तुलना करें तो बीच का दिन 154 से 167 पर, और सबसे ख़राब दसवाँ हिस्सा 301 से 303 पर। साँस के सबसे कठिन दिन वहीं के वहीं खड़े हैं। दिन गिनती में बढ़े, हवा उतनी ही ख़राब रही।
Against the WHO standard
PM two point five पर आज दर्ज 43 में से 41 स्टेशन WHO सीमा के पार, और PM ten पर 44 में से 44। मौसम का हिस्सा निकाल देने पर भी दिल्ली का अपना PM two point five WHO की सुरक्षित सीमा से 2.2 गुना ऊपर बैठता है।
'ख़राब' या उससे बदतर हवा आज दिल्ली के 2 स्टेशनों पर दर्ज हुई। इनके चार किलोमीटर के दायरे में बसते हैं 16 लाख लोग, दिल्ली की 8 प्रतिशत आबादी। एक स्टेशन का आँकड़ा चार किलोमीटर तक ही उसके इलाक़े की हवा माना जाता है।
आज की सबसे बड़ी बात यह, कि मौसम का असर पूरी तरह निकाल देने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten लगातार 79 दिन से पिछले साल के इन्हीं दिनों से ऊपर टिका है। मई से अब तक जितने दिनों के आँकड़े हैं, उनमें एक दिन भी पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। 1 दिन का आँकड़ा नहीं है। यह फ़र्क़ इन दिनों में औसतन 14 माइक्रोग्राम रहा। इस साल के 228 में से 155 दिन पिछले साल से ऊपर रहे हैं। फ़र्क़ अब भी बना हुआ है, पिछले हफ़्ते में घटा ज़रूर है। बिगड़ाव क़ायम, रफ़्तार धीमी। असली कहानी आज यही है।
What it does to health
बच्चे, बुज़ुर्ग और दिल व साँस के मरीज़ इस स्तर पर तकलीफ़ महसूस कर सकते हैं।
Weather is not the excuse
बारिश पिछले साल के 5.5 मिमी से गिरकर इस बार 0 मिमी रही, और बिना बारिश प्रदूषण धुलता नहीं, इसलिए वह ज़्यादा टिका और हवा बदतर दिखी। मौसम का असर हटाने पर भी शहर के औसत AQI में पिछले साल से 4 अंक की बढ़त है, यानी असली प्रदूषण बढ़ा; दिखने वाले बिगड़ाव में मौसम का हाथ बड़ा है।