प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 22 August 2026

परिभाषा बदल जाने से साँस का ज़हर नहीं बदलता।

आज दिल्ली का औसत AQI 86 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

98.7 लाख
दिल्लीवाले ख़राब या उससे बदतर हवा में
ख़राब या उससे बदतर पढ़ने वाले 11 स्टेशनों के चार किलोमीटर के दायरे में
47.1%
शहर की आबादी का हिस्सा
आज यही हवा ले रहे हैं
157
Wazirpur
Moderate

आज के कार्ड

गिनतीदो आँकड़ेसबसे ख़राब स्टेशनचार किलोमीटर के दायरे के लोगस्टेशनों का फैलावआख़िरी कार्डचौड़ा कार्ड

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 21 अगस्त सुबह 10 बजे से 22 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 15 अगस्त से 29 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 4.0 MB
हिंदी में। अवधि 100 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

What it does to health
University of Chicago का Air Quality Life Index कहता है, दिल्ली की हवा हर जीवन से कई साल छीन लेती है।
Wazirpur के चार किलोमीटर के दायरे में 14 लाख लोग बसते हैं, और आज वहीं दिल्ली का सबसे ख़राब AQI 157 दर्ज हुआ। यह किसी औसत की गिनती नहीं, इतनी आबादी के फेफड़ों का हिसाब है।
Against the WHO standard
PM two point five पर 42 में से 38 स्टेशन WHO सीमा के पार, और PM ten पर 43 में से 43, यानी एक भी बाहर नहीं। मौसम हटाकर देखें तो दिल्ली का अपना PM two point five WHO की सुरक्षित सीमा से 2.2 गुना ऊपर ठहरता है; साँस में आज 1.7 गुना उतरा।
मौसम का असर निकाल देने पर भी दिल्ली का अपना PM ten पिछले साल के ठीक इन्हीं दिनों से लगातार 85 दिन ऊपर बना हुआ है। 30 मई से आज तक, पूरे 85 दिन, एक दिन भी पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। इनमें 16 दिन ऐसे हैं जिन पर फ़र्क़ इतना छोटा रहा कि उसे पक्का नहीं कहा जा सकता; बाक़ी दिनों पर वह साफ़ दिखता है। इन 85 दिनों का औसत फ़र्क़ 13 micrograms per cubic metre रहा है। इस साल के 234 में से 161 दिन पिछले साल से ऊपर बीते हैं। पिछले हफ़्ते यह फ़र्क़ सिकुड़ा है, और आख़िरी कुछ दिनों पर वह इतना छोटा है कि अकेले उन पर पक्का दावा नहीं बनता। पर पूरे मौसम का औसत फ़र्क़ हर जाँच में साफ़ ऊपर ठहरता है। बिगड़ाव वहीं का वहीं है, बस रफ़्तार धीमी पड़ी है। और यही आज की असली कहानी है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें: पहली, PM ten के स्रोतों, निर्माण-धूल और सड़क-धूल, पर तुरंत सख़्ती। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur के इलाक़े में स्थानीय स्रोतों पर कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी। तीसरी, ‘ख़राब’ से ऊपर के हर दिन जन-स्वास्थ्य protocol लागू हो।
Worst station
Wazirpur आज सबसे बुरी हालत में रहा। वहाँ PM ten 179 micrograms दर्ज हुआ, WHO सीमा से 4 गुना ऊपर; और मौसम हटाने पर भी 146.8 micrograms, यानी 3.3 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों, ख़ासकर NO2, में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं, इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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