प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 24 August 2026

PM two point five चढ़ा, हवा ‘ख़राब’ हुई, जवाब कौन दे?

आज दिल्ली का औसत AQI 112 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

296
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Anand Vihar, ख़राब, PM2.5
+19
एक्यूआई अंक पिछले साल से बदतर
Anand Vihar, मौसम का असर हटाकर

आज के कार्ड

गिनतीदो आँकड़ेसबसे ख़राब स्टेशनचार किलोमीटर के दायरे के लोगस्टेशनों का फैलावआख़िरी कार्डचौड़ा कार्ड

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 23 अगस्त सुबह 10 बजे से 24 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 17 अगस्त से 31 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 4.0 MB
हिंदी में। अवधि 128 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

30 मई से आज तक, लगातार 87 दिन, मौसम का असर हटाने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten पिछले साल के ठीक इन्हीं दिनों से ऊपर है। इन 87 दिनों में एक भी दिन वह पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। 17 दिन ऐसे ज़रूर रहे जिन पर फ़र्क़ इतना छोटा था कि उसे पक्का नहीं कहा जा सकता; बाक़ी हर दिन वह साफ़ दिखा। इन 87 दिनों में औसतन यह फ़र्क़ 13 micrograms per cubic metre का रहा है। इस साल अब तक के 236 दिनों में से 163 पिछले साल से ऊपर रहे। पिछले हफ़्ते फ़र्क़ घटा ज़रूर है, और आख़िरी कुछ दिनों पर वह इतना छोटा है कि अकेले उन दिनों का पक्का दावा नहीं बनता। पर पूरे मौसम का औसत फ़र्क़ हर जाँच में साफ़ ऊपर ठहरता है। बिगड़ाव क़ायम है, रफ़्तार भर धीमी पड़ी है। और यही आज की असली कहानी है।
बात सिर्फ़ औसत की नहीं है। इस साल औसत दिन पर दिल्ली के 13 मॉनिटर, यानी क़रीब हर तीसरा, AQI दो सौ के पार पढ़ते रहे; पिछले साल यह 30 प्रतिशत था। औसत तो कोई साँस में नहीं लेता, हर कोई अपने ही इलाक़े की हवा लेता है।
एक स्टेशन की रीडिंग चार किलोमीटर तक ही भरोसेमंद मानी जाती है, पर दिल्ली के 44 निगरानी क्षेत्रों में से 29 इससे आगे तक फैले हैं। 26 लाख दिल्लीवासी तो किसी भी स्टेशन से चार किलोमीटर दूर बसते हैं।
44 में से 38 स्टेशन पर आज प्रमुख प्रदूषक PM ten है, शहर की हवा यही सबसे ज़्यादा बिगाड़ रहा है।
एक संकेत और: पिछले साल इन्हीं दिनों से sulphur dioxide 41 percent ऊपर है। यह अतिरिक्त संदर्भ भर है; आज के आकलन का आधार भरोसेमंद PM two point five और PM ten ही हैं।
What it does to health
इस हवा में बच्चों, बुज़ुर्गों और साँस-दिल के मरीज़ों को तकलीफ़ हो सकती है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें: पहली, PM ten के स्रोतों (निर्माण-धूल, सड़क-धूल) पर तुरंत सख़्ती। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur में स्थानीय स्रोतों पर तुरंत कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी। तीसरी, हर स्टेशन का real-time AQI नागरिकों को खुले तौर पर मिले।
Weather is not the excuse
पिछले साल के मुक़ाबले इस बार इन्वर्ज़न तापमान 0.2°C से चढ़कर 0.8°C, इन्वर्ज़न तापमान बढ़ने पर प्रदूषण ज़मीन के पास टिक जाता है; मिक्सिंग ऊँचाई 460.6 से गिरकर 349.6 मीटर, कम मिक्सिंग ऊँचाई में प्रदूषण घुटता है, इसीलिए वह ज़्यादा टिका और हवा बदतर दिखी। पर मौसम का असर हटाने पर पूरे शहर के औसत में AQI पिछले साल से 3 अंक ऊपर बैठता है, असली प्रदूषण बढ़ा है; दिखने वाले बिगड़ाव में मौसम का बड़ा हाथ है।
Against the WHO standard
WHO सीमा से ऊपर, PM two point five पर आज दर्ज 44 में से 42 स्टेशन; PM ten पर 43 में से 43। दिल्ली ने आज जो PM two point five साँस में लिया, वह WHO की सुरक्षित सीमा से 2.8 गुना ऊपर था, और मौसम का असर हटाने पर भी 2.1 गुना ऊपर ठहरता है।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैसों का दर्ज स्तर दुनिया भर के शोध में सवालों के घेरे में है, इसलिए आकलन का आधार भरोसेमंद PM2.5 और PM10 हैं। पर SO2 की यह तुलना पिछले साल इन्हीं दिनों से उसी माप-प्रणाली पर है, इसलिए इसकी बढ़त की दिशा भरोसेमंद है; गैस केवल अतिरिक्त संदर्भ है।

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