प्रकाशक Ajay Maken, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 30 July 2026

मौसम हटाने पर भी दिल्ली की हवा लगातार 61 दिन से पिछले साल से बदतर है। एक दिन भी राहत नहीं। यह टिकाऊ प्रदूषण है, मौसम नहीं।

आज दिल्ली का औसत AQI 121 दर्ज हुआ है, और मौसम का असर हटा देने पर भी यह पिछले साल की तुलना में ऊपर ही ठहरता है।

61
लगातार दिन बदतर
पिछले साल की इसी अवधि से
137 / 210
इस साल बदतर दिन
2026 में मापे गए कुल दिनों में से
+15.3
औसत अधिकता, µg/m³
PM10 पिछले साल से ऊपर, मौसम का असर हटाकर
विश्लेषण की अवधि: 29 जुलाई सुबह 10 बजे से 30 जुलाई सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 23 जुलाई से 6 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 0.6 MB
हिंदी में। अवधि 115 सेकंड।

सबूत

रोज़ का residual: इस साल का स्तर घटा पिछले साल का

■ लाल रेखा: मौसम का असर हटाने के बाद का residual। शून्य रेखा से ऊपर यानी प्रदूषण पिछले साल से ज़्यादा था; शून्य रेखा से नीचे यानी कम था।
+0+10+20+30 पिछले साल के बराबर +3.7 30 May29 Jun30 Jul µg/m³
हर बिंदु एक residual है: उस दिन का PM10 स्तर, घटा पिछले साल की इसी अवधि का स्तर, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। शून्य रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच पिछले साल से बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं; रेखा से नीचे का मतलब है सचमुच साफ़।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

Weather is not the excuse
इस बार मिक्सिंग ऊँचाई पिछले साल के 493 मीटर से घटकर 409.8 मीटर रह गई, और कम मिक्सिंग ऊँचाई में प्रदूषण घुटकर वहीं जमा रहता है, इसलिए यह ज़्यादा टिका और हवा देखने में बदतर लगी। मगर मौसम का असर हटा देने पर भी AQI पिछले साल से 3 अंक ऊपर है, यानी असली प्रदूषण चढ़ा है; दिखने वाले बिगड़ाव में मौसम का बड़ा हाथ रहा।
dw_station_breadth
मौसम का हिस्सा गणित से अलग कर देने के बाद भी दिल्ली के सभी 30 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर हैं, औसतन 3 AQI अंक ऊपर। यह बढ़ोतरी शहर के हर कोने में मौजूद है, कोई स्टेशन इससे बचा नहीं।
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, यानी de-weathering, का मतलब यह है कि हम आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का असर गणित के ज़रिए निकाल देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धोकर या बहाकर ले जाती है, जबकि ठहरा हुआ मौसम उसे रोके रखता है, इसलिए किसी एक दिन की हवा अच्छी या बुरी सिर्फ़ मौसम की वजह से भी दिख सकती है। मौसम का यह असर हट जाने के बाद जो शेष बचता है, वही शहर का अपना, सचमुच का प्रदूषण है, और वही 61 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
aqi_rose_yoy
सबसे चिंताजनक बात यह है कि दिल्ली का AQI पिछले साल इन्हीं दिनों की तुलना में 36 अंक चढ़ चुका है। हवा में राहत के बजाय और बिगाड़ आया है।
Against the WHO standard
दिल्ली के 43 में से 41 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा को लाँघ चुके हैं, और 43 में से पूरे 43 स्टेशन PM ten की WHO सीमा से ऊपर हैं।
What it does to health
इस स्तर की हवा में साँस और दिल के रोगियों, छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों की तबीयत बिगड़ सकती है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। पहली, PM ten के स्रोतों यानी निर्माण-धूल और सड़क-धूल पर बिना देर किए सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur का इलाक़ा, जहाँ PM ten 151.2 micrograms यानी WHO सीमा से 3.4 गुना ऊपर है, और यहाँ मौसम-मुक्त हवा पिछले साल से 9 अंक और बिगड़ चुकी है, वहाँ स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी हो। तीसरी, ‘ख़राब’ से ऊपर वाले दिनों में जन-स्वास्थ्य protocol लागू किया जाए।
Worst station
सबसे ख़राब हालत Wazirpur की है, जहाँ मौसम का असर हटा देने पर AQI 135 पर पहुँचता है और PM ten 151.2 micrograms, यानी WHO सीमा से 3.4 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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